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जैविक खेती में नीमास्त्र का चमत्कार: घर पर बनाएं प्राकृतिक कीटनाशक, Method of making Neemastra

By ऑर्गैनिक खेती

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जैविक खेती में नीमास्त्र का चमत्कार
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नीमास्त्र बनाने की विधि:-जैविक खेती में प्राकृतिक तरीकों का उपयोग कर कीटनाशक तैयार करना एक सस्ता और पर्यावरण तरीका है। नीमास्त्र ऐसा ही एक प्रभावी जैविक कीटनाशक है, जो नीम के गुणों पर आधारित है। यह कीटों, फंगस, और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने के साथ-साथ पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। आइए, नीमास्त्र बनाने की विधि और इसके उपयोग को समझें।


नीमास्त्र बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

  1. ताजे नीम के पत्ते: 5 किलोग्राम
  2. गोमूत्र: 5 लीटर
  3. पानी: 50 लीटर
  4. मिट्टी का बर्तन या प्लास्टिक ड्रम
  5. लकड़ी की छड़ी: हिलाने के लिए।
  6. साबुन पानी: 50 ग्राम कपड़े धोने वाला साबुन (छिड़काव में चिपकाव बढ़ाने के लिए)।

नीमास्त्र बनाने की विधि

  1. नीम के पत्तों को कुचलें: ताजे नीम के पत्तों को पीसकर या कुटकर लुगदी बना लें। इससे पत्तों में मौजूद रस निकाल लें।
  2. सामग्री मिलाएं: कुचले पत्तों को मिट्टी के बर्तन में डालें। इसमें गोमूत्र और पानी मिलाएं।
  3. बनाने के तरीका: मिश्रण को ढककर 5-7 दिनों के लिए छायादार जगह पर रखें। रोजाना लकड़ी की छड़ी से हिलाएं, ताकि ऑक्सीजन मिले और घोल सही से तैयार हो।
  4. छानना: 7वें दिन मिश्रण को कपड़े से छान लें। इसमें 50 ग्राम साबुन घोलकर मिलाएं (यह घोल को पत्तियों पर चिपकने में मदद करता है)।
  5. भंडारण: नीमास्त्र को ठंडी और अंधेरी जगह पर रखें। इसे 15 दिनों तक प्रयोग कर सकते हैं।

जैविक खेती में नीमास्त्र का उपयोग

छिड़काव का तरीका

    • नीमास्त्र को पानी में 1:10 के अनुपात में मिलाएं (1 लीटर नीमास्त्र + 10 लीटर पानी)।
    • इसे फसलों पर सुबह या शाम के समय छिड़कें। धूप में छिड़काव न करें, वरना पत्तियां झुलस सकती हैं।
    • स्प्रे करते समय पत्तियों के निचले हिस्से पर ध्यान दें, क्योंकि अधिकांश कीट वहीं छिपे होते हैं।

    उपयोग

      • कीटों के प्रकोप के शुरुआती लक्षण दिखते ही 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
      • बारिश के बाद छिड़काव दोहराएं।

      लाभ

        • कीट नियंत्रण: यह मिलीबग, सुंडी, और सफेद मक्खी जैसे कीटों को दूर भगाता है।
        • फंगल रोकथाम: पाउडरी मिल्ड्यू और लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों को कम करता है।
        • मित्र कीटों को सुरक्षा: मधुमक्खी और केंचुआ जैसे लाभदायक जीवों को नुकसान नहीं पहुंचाता।
        • मृदा स्वास्थ्य: नीम के तत्व मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।

        ध्यान रखने योग्य बातें

        • नीमास्त्र को हमेशा ताजा बनाएं, क्योंकि लंबे समय तक रखने पर इसकी प्रभावशीलता घटती है।
        • छिड़काव के दौरान हाथों में दस्ताने और मुंह पर मास्क पहनें।
        • यदि गोमूत्र उपलब्ध न हो, तो नीम के बीज का तेल (250 मिली) या नीम की खली (2 किलो) भी प्रयोग कर सकते हैं।

        नीमास्त्र जैविक खेती में कीटों को मारने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। यह किसानों को रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है और पर्यावरण, मिट्टी व मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। नीमास्त्र के नियमित उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बढ़ाई जा सकती है। खेती में आर्गेनिक तरीकों से हम टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। धन्यवाद!

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